अनीश्वरवादी होने का झूठा अपमान सहता ।
धर्म की गलियों की भीड़ मेँ खड़ा है ईश्वरवादी ?
बुद्धत्व को प्राप्त शून्य के पार अनीश्वरवादी ?
धन्य !भीड़ का धर्म,भौतिकताओँ पर टिका
बुद्ध खड़ा अकेला,धर्मपथ का हर राही अकेला ।
अनीश्वरवादी होने का झूठा अपमान सहता ।
धर्म की गलियों की भीड़ मेँ खड़ा है ईश्वरवादी ?
बुद्धत्व को प्राप्त शून्य के पार अनीश्वरवादी ?
धन्य !भीड़ का धर्म,भौतिकताओँ पर टिका
बुद्ध खड़ा अकेला,धर्मपथ का हर राही अकेला ।
फिर भी धर्म खड़ा अकेला भीड़ बीच ।
माया ,मोह ,लोभ व काम मेँ जीती ये भीड़
इस भीड़ बीच 'कबीर' को उपाधि अनीश्वरवादी
खुद को ईश्वरवादी व धार्मिक हमझे ये भीड़
क्योँ की निर्जीव व मानवनिर्मित की पूजक ये भीड़ ।
ईमान नहीं ,सत नहीं ,कहीँ भी परोपकार नहीँ
चंद कीमत पर धूप जल व पुष्प समर्पण कर
सांसारिकता को पाने की लालसा मेँ भीड़ का धर्म ।