रविवार, 28 फ़रवरी 2010

25नवम्बर2002:अरमान सिंह यादव

25नवम्बर2002:शिशु मन्दिर मेँ आखिरी कार्य दिवस था सम्भवत: ! मेरे प्रधानाचार्य थे अरमान सिँह यादव .शिशु मन्दिर योजना मेँ कार्य करते मुझे साढ़े चार वर्ष पूर्ण हो चुके थे.आरमान सिँह यादव के कार्य काल मेँ कार्य करते ढाई साल पूरे हो चुके थे .जिनसे हतासा निराशा ही पल्ले पड़ी थी.अभी तक मैने इतना शातिर दिमाग का व्यक्ति नहीँ देखा था.मैँ वैसे भी दुनियाँ मेँ रहते हुए दुनियाँ मेँ नहीँ रहा हूँ.दुनियाँ मेँ कौन मुझे समझ पाया है? आदमी की स्थूल निगाहेँ स्थूल ही देख पाती हैँ.जिसकी एक हद है.जिसके पार भी बहुत कुछ है जिसे मन एवं आत्मा ही महसूस कर सकती है.मेरे प्रदर्शन सेँ मुझे कौन समझ सके हैँ? अरमान सिँह यादव ने हमेँ पहचान अपने जीवन मेँ एक बड़ी भूल कर दी जिसका मैँने साँसारिक नुकसान उठाया ही .क्या अरमान सिँह पर प्रभाव नहीँ पड़ने वाला?मानव जीवन मेँ 7 संख्या का बड़ा महत्व है जो कि 'कुण्डलिनी जागरण:सात शरीर ' सम्बन्धित प्रवचनोँ से स्पष्ट होता है.खैर जो होता है ठीक होता है जो नहीँ होता वह भी ठीक होता है.चलना ही जीवन है,मुझे शिशु मन्दिर छोड़ना पड़ा.मैँने अरमान सिँह यादव का क्या बिगाड़ा था.उन्होँने ही मुझे नुकसान पँहुचाने का प्रयत्न किया.आज समाचार पत्रोँ के माध्यम से जाना कि नाना जी देशमुख नहीँ रहे . वर्ष 1950मेँ उन्होँने गोरखपुर मेँ देश का पहला सरस्वती शिशु मन्दिर खोला.उनके पोते यशवंत देशमुख के अनुसार-"आप हैरान हो सकते हैँ कि खालिस संघी विचार धारा को कोई व्यक्ति आखिर कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना के नवासे नुस्ली वाडिया का अभिभावक कैसे हो सकता है...उनका व्यक्तित्व हर किसी को अपनी ओर खीँचता था." शेष फिर......

गुरुवार, 25 फ़रवरी 2010

लघु कथा: नक्सली छाँव.......

1857 क्राति की 150वीँ वर्षगाँठ पूरे देश मेँ मनायी जा रही थी.इस अवसर पर कुछ भारतीय युवक युवतियोँ नेँ भारतीय संविधान की शपथ ले कर एक दल 'सैक्यूलर फोर्स'की स्थापना कर रखी थी.जिस पर नक्सली दबाव डाल रहे थे कि हमसे मिल जाओ लेकिन निर्दोष लोगोँ की हत्या करने वाले नक्सलियोँ से देशभक्त कैसे मिल सकते थे?सैक्यूलर फोर्स का एक युवा सदस्य आलोक वम्मा को किसी काम से शहर राँची जाना हुआ जहाँ उसक़ी एक युवा शिष्या शिवानी ने उसे राजो मण्डल से मिलवाया.आलोक वम्मा ने उससे पूछा-"आखिर ऐसी क्या मजबूरियाँ थीँ कि तुम्हेँ नक्सलियोँ की शरण मेँ जाना पड़ा?"राजो मण्डल बोली-"मैने किशोरावस्था मेँ कदम ही रखे थे.मेरी भाभी ने पूरे परिवार पर दहेज एक्ट लगा रखा था.सब जेल मेँ थे .बस मैँ ही घर मेँ अकेली बची थी.गाँव मेँ मेरा एक मुँहबोला भाई था. मैँ उसी के साथ कचहरी अदालत आदि के चक्कर लगा रही थी और खेती के कार्य देख रही थी.एक दिन मुझे अकेले ही अदालत जाना था. जाने के लिए कोई सवारी नहीँ मिल रही थी.जल्दी के चक्कर मेँ मेँ एक ट्रक पर बैठ गयी . हमेँ क्या पता था कि यह ट्रक ड्राईवर कामान्ध होते हैँ. " फिर राजो की आँखोँ मेँ आँसू आ गये.वह फिर सिसकते हुए बोली-"पहले ट्रक मेँ ही फिर आगे जा एक ढाबा पर अनेक ट्रक ड्राईबरोँ ने मेरे साथ कुकर्म किया.मैँ बेहोश हो चुकी थी जब मुझे होश आया तो फिर मैने एक कमरे मेँ युवकोँ एवं किशोरोँ से अपने को घिरा पाया जो दारू पी रहे थे.जिन्होंने फिर हमारे शरीर के साथ खूब मनमानी की .जब छक गये तो मुझे बाहर निकाल एक चौराहे पर छोड़ आये.सुबह जब कुछ टहलने वालोँ ने देखा तो मुझे पुलिस के अधीन कर दिया गया . थाने मेँ मुझे दो दिन रखा गया फिर पुलिस वाले एवं शायद कुछ नेता बारी बारी से मेरे ऊपर उतरते गये.इत्तफाक से उस थाने पर नक्सलियोँ ने धावा बोल दिया.थाने मेँ कुछ नक्सली बन्द थे.नक्सली मुझे भी साथ लेकर जंगल मेँ अपने ठिकाने पर आ गये. मेरे स्वस्थ हो जाने पर मुझे अन्य किशोरियोँ युवतियोँ के साथ ट्रेनिँग दी जाने लगी. मैने दोषियोँ को खोज खोज कर विकलांग बना दिया एवं अपने परिवार को न्याय दिलवा दिया लेकिन सात आठ सालोँ के दैरान नक्सलियोँ के द्वारा निर्दोष लोगो की हत्याऔ पर विचलित एवँ परेशान होती रही.अभी एक महीना पहले मेरी शिवानी से मुकालात हुई. पहली मुलाकात तब हुई थी जब इसे नक्सलियो के बीच लाया गया था लेकिन आप इसे तथा इसके भाई अरमान को राँची मेँ ला आये थे और इनके पढाई की व्यवस्था की थी.जब दुवारा मेरी शिवानी से मुलाकात हुई तो मैने अपनी भड़ास निकाल डाली. तब शिवानी बोली-सब ठीक हो जाएगा , सर जी को आने दो.मैँ तो गुजरात के गोसार की रहने वाली थी . गोधरा काण्ड के बाद मेरे साथ क्या क्या नहीँ हुआ तुम्से कुछ छिपा नहीँ है.हाँलाकि कुप्रबन्धन भ्रष्टाचार अन्याय आदि के कारण नक्सलवाद को बड़ावा मिल रहा है लेकिन उनके द्वारा निर्दोषोँ के कत्ल एवं परेशान करना मुझे दिल गवाही नहीँ देता."आलोक वम्मा बोला-हम पर तो वे काफी दबाव डाल रहे है हमे अपने साथ लेने के लिए लेकिन वहाँ की छाँव छाँव है नहीँ.

दीन- ए- इलाही:आवश्यकता एक सैकयूलर फोर्स की

देश के समक्ष सभी समस्याओँ की जड़ है -हमारा मन, जो कि अध्यात्मिक शिक्षा एवं विधि साक्षारता के बिना नहीँ संवारा जा सकता है . देश के सामने सबसे बड़ी बिडम्वना यह है कि आदर्शात्मक व्यवहार के लिए साहस का अभाव एवं संविधान के अनरूप चलने वालोँ को पुलिस तथा वकीलोँ की ही मदद न मिल पाना . भ्रष्टाचार ,बहुलवाद, क्षेत्रवाद ,साम्प्रदायिकता, दबंगवाद ,आदि मेँ दब कर व्यवहार मेँ संवैधानिक उद्देश्य समाप्त होने लगते हैँ . ऐसे मेँ संवैधानिक वातावरण बनने के बजाय मनमानी, पक्षपात ,दबंगवाद का शिकार हो अन्दर ही अन्दर मानसिक अशान्ति , असन्तुष्टि एवं अलगाव के बीज उत्पन्ऩ कर देता है.ऐसे मेँ विचलन , पलायन तथा मानसिक दूरियाँ पैदा होकर ऐसे लोगोँ का साथ पा जाती हैँ जो व्यक्ति को या तो अपराध या अध्यात्म की और मोड़ देती हैँ .अध्यात्म की ओर तो विरलोँ का ही झुकाव होता है, हाँ !ऐसा तो हो सकता है कि व्यक्ति तन्हा एवं एकाकी मानसिकता से ग्रस्त हो कर पागल विछिप्त हो जाए या आत्म हत्या कर बैठे . कुप्रबन्धन एवं भ्रष्टाचार के लिए अध्यापक पुलिस वकील नेता एवं आध्यात्मिक नेता दोषी हैँ. जब यह ही संविधान एवं अध्यात्म के प्रति जागरुक नहीँ हैँ तो अन्य से कैसे उम्मीद की जाए? ऐसे मेँ यदि लोग विचलित हो कर अपराध अलगाववाद आतँकवाद नकसलवाद आदि के शिकार हो जाएँ तो ऐसे मेँ अपराध, अलगाववाद, आतँकवाद, नकसलवाद और भी क्या कोई दोषी नहीँ कि अपराधी ,अलगाववादी, आदि ही सिर्फ दोषी है.विभिन्न समस्याओँ के निदानोँ का अध्ययन क्या सिर्फ पढ़कर अंकतालिकाएँ इकट्ठा करने या सेमीनार तक ही रखने एवं उनकी व्यवहार मेँ बात करने वाले को सनकी पागल कहने या उनको झूठ के सहारे फँसा देना है? यदि सभी समस्याओँ की जड़ हमारा मन है तो ऐसे मेँ आध्यात्मिक शारीरिक शिक्षा तथा वकील पुलिस व शिक्षक वर्ग के लिए आचरण मेँ विधि कठोरता आवश्यक है .एक नकसलवादी विचारक का कहना ठीक ही है कि जो कानून का पालन कराने वाले एवं संरक्षक हैँ वे अपने जीवन मेँ कानून का क्या 25 प्रतिशत भी पालन करते है? वकील पुलिस एवं शिक्षक वर्ग का संवैधानिककरण कर भावी सैकयूलर फोर्स का अंग बनाना आव श्यक है. देश मेँ एक ऐसे सैकयूलर फोर्स की आवश्यकता है जो राष्ट्र की विभिन्न समस्याओँ के निदानात्मक व्यवहार या संवैधानिक जीवन मेँ लगे हैँ उनकी हर हालत मेँ मदद करे.जिसके लिए कुर्बानी क्योँ न करनी पड़े. साथ मेँ राजनैतिक स्तर पर वोट की राजनीति से हट सद्भावना एवं भाई चारे की स्थापना के लिए शेर शाह सूरी एवं सम्राट अकबर से प्रेरणा लेनी आवश्यक है. अन्तर्जातीय विवाह प्रेम विवाह जातिवाद विरोधी व्यवहार आदि रखने वाले व्यक्तियोँ को हर हालत मेँ मदद पहुँचायी जाए तथा ऐसोँ को भी आरक्षण दिया जाए. वाह भाई वाह !संविधान विरोधी, जातिगत, क्षेत्रीयगत ,सम्प्रदाय गत, आदि लोगोँ को संरक्षण लेकिन संवैधानिक जीवन जीने वालोँ को दर दर की ठोकरेँ!? हाँ ,दूसरी और यह भी-देश मेँ सबसे सुरक्षित- आतँकवादी कसाब! जिन्दा आम आदमी की कीमत जानवरोँ से भी कम .

मंगलवार, 23 फ़रवरी 2010

आम आदमी : अशान्ति एवं ��सन्तुष्टि

हिन्दुस्तान,23फरबरी 2010,अरुण कुमार त्रिपाठी का लेख -'नेहरु का सपना और आम आदमी' ठीक ही लिखता है - "........बहुलवाद, धर्मनिरपेक्षता और सभी के लिए न्याय ही हिँसा और तनाव रहित भारतीय लोकतन्त्र का आधार हो सकता है. समृद्धि और समावेशी विकास लोकतन्त्र को टिकाऊपन देता है और इसी से माओवाद और आतँकवाद जैसी अलोकतांत्रिक शक्तियोँ से लड़ने की ताकत मिलती है. " .....लेकिन देश की विभिन्न समस्याओँ को मनोविषय की दृष्टि से भी देखना आवश्यक है. स्थूल एवं भौतिक विश्लेषण ही आवश्यक है.अभी तक का हमारा यही अनुभव है कि सभी समस्याओँ की जड़ हमारा मन है.17-18वीँ सदी से आधुनिक विकास की जो दौड़ शुरू हुई है वह मानसिक भौतिक प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है . और फिर हमारे विद्वान अन्तरिक्ष मेँ जीवन खोजने मेँ लगे हैँ हम अब भी राजपूतानी काल के रीतिरिवाजोँ ,अन्ध विश्वासोँ से चिपके है. सदियोँ से चले आ रहे प्रभावोँ को मन से विदा नहीँ कर पा रहे हैँ और आज के चका चौँध मेँ भी खोया हुए हैँ. ऐसे मेँ भटकाव तथा अवसरवाद की स्थिति पैदा होगयी है.अशान्ति एवं असन्तुष्टि की अति व्यक्ति को खिन्न बना कर बागी बना देती है या पागल विछिप्त या आत्महत्या की स्थिति तक पहुँचा देती है.ऐसे मेँ क्या उपाय है व्यक्ति की श्रेष्ठ दिशा व दशा बनाने के लिए?उपाय है आध्यात्मिक, शारीरिक नैतिक शिक्षा . प्रत्येक युवक युवती के लिए पाँच वर्ष की सैन्य सेवा अनिवार्य की जानी चाहिए .विभिन्न पदोँ एवं चुनाव मेँ प्रत्याशियोँ के लिए नारको परीक्षण तथा ब्रेन रीडिँग अनिवार्य किया जाना चाहिए.सिर्फ भैतिक स्थूल चमकधमक के विकास से सब कुछ सम्भव नहीँ है.अशान्ति एवं असन्तुष्टि तो मन की दशा है उसे मनोविषय के स्तर पर ही सुलझाना होगा.....JAI HO....OM..AAMEEN.

सोमवार, 22 फ़रवरी 2010

22फरबरी:कस्तूरबा पुण्�� दिवस

प्रकृति मेँ अकेला तत्व स्वयं मेँ क्या है? विभिन्न तत्वोँ मेँ सन्तु लन -असन्तुलन से ही प्राकृतिक घटनाएँ है . जो आकर्षण -प्रतिकर्षण के बिना असम्भव है. प्रकृति मेँ मानव सत्ता महत्व पूर्ण है, जिसके दो ध्रुव हैँ- नारी एवं पुरूष . नर- नारी एक दूसरे के लिए परस्पर श्रेष्ठ सहज एवं नैसर्गिक मित्र हैँ लेकिन हमारी कुण्ठित, लिँगभेदी और भोगवादी सोँच ने नर -नारी सम्बन्धोँ के बीच अनेक संदिग्ध सवाल तथा भ्रम पैदा कर दिए हैँ. किसी ने कहा है कि जिसे पति या पत्नी के रूप मेँ यदि सच्चा मित्र मिल जाता है तो उसका जीवन धन्य हो जाता है. श्रेष्ठ पतिव्रता महिलाओँ मेँ से एक नाम है- कस्तूरबा गाँधी का .11 अप्रैल 1869 को जन्मी कस्तूरबा का अपने पति कर्मचंद्र गाँधी को काफी सहयोग रहा .बाल विवाह के बावजूद इन्होँने शुरू से ही अपने दायित्वोँ को भली -भाँति निभाया. अपने आखिरी दिनोँ मेँ अपनी अस्वस्थता के बाबजूद साहस एवं सँयम से काम लिया. हालाँकि वे महात्मा गाँधी की मृत्यु से लगभग 4 वर्ष पहले दुनिया से गुजर गयीँ लेकिन उनका गाँधी -आन्दोलन मेँ महत्वपूर्ण योगदान रहा. हमेँ सीख लेना चाहिए कि स्थूलताओँ (शरीर एवं वस्तुओँ )के विकारोँ -रोगोँ से घबराना नहीँ चाहिए. स्थूलता वैसे भी परिवर्तन शील है और यही प्रदूषण का कारण है ,जो कि दो प्रकार का होता है -कृत्रिम एवं प्राकृतिक .यदि हम अपने मन को ऊपर से और विकृत कर लेँ तो विकार एवं समस्याएँ बढ़ती ही है. हमेँ अपना धैर्य एवं साहस कदापि नहीँ खोना चाहिए और हर हालत मेँ पुरुषार्थ के चारोँ स्तम्भ धर्म अर्थ काम मोक्ष मेँ सन्तुलन बनाये रखना चाहिए और फिर परहित ही धर्म है ........JAI HO....OM...AAMEEN.

रविवार, 21 फ़रवरी 2010

08 मार्च : नारीसशक्तिकरण पर प्रश्न

नारी और पुरुष मानवसत्ता के दो पहिया हैँ जो सन्तुलित होना आवश्यक है . पश्चिम से उधार लिए गये भोगवादी भैतिकवाद मेँ नारीवाद एवं नारीसशक्तिकरण के दावोँ के बीच कुछ कानूनोँ के दुरुपयोग के माध्यम से आज की नारी का व्यवहार पारिवारिक कलह का कारण बन हुआ है यहाँ तक कि महानगरीय संस्कृति मेँ आत्मनिर्भर एवं स्वेच्छ नारी 'पुरुषवैश्याओँ' तक को जन्म दे रही है . 'मै' और 'तू' की भाषा, अहंकार ,आत्मनिर्भरता, अर्थ एवं काम की लालसा, आदि ने परस्पर एक दूसरे के लिए समस्याएँ खड़ी कर दी हैँ. इन पर्वोँ का जो उद्देश्य होता है उस प्रति हम संवेदन हीन हो चुके हैँ. जैसे, अब हिन्दी दिवस की ही बात लेँ बेचारी हिन्दी रोज मर्रे की जिन्दगी मेँ क्या सम्मान से दूर नहीँ होरही है. भारतीय मैकालोँ के बीच मेँ हिन्दी रोज सिसकती है परेशान होती है ........अंग्रेजी की ओर दौड़ लगाने वालोँ की संख्या मेँ प्रतिदिन वृद्धि हो रही है लेकिन.....? इसीतरह नारी दिवस ..भैतिकवादी भोगवाद मेँ पश्चिम उधार लिया गया नारीसशक्तिकरण भारतीय समाज एवं परिवारोँ का भला नहीँ कर सकता. नारीअधिकार एवं समानता के उपायोँ को वैदिक काल से ग्रहण करना होगा. जहाँ शादी एवं विवाह तक का उद्देश्य DHARM बताया गया है .PURUSHARTH के चार स्तम्भ मेँ से DHARM और MOKSH विदा हो चुका है. ARTH और KAM बाकी है, यही दुख का कारण है. अब नारी मेँ पन्नाधाय, जीजा बाई, अपाला, घोषा, गार्गी ,सावित्री, कस्तूरबा गाँधी, भगिनी निवेदिता, आदि जैसी कुशलता पाने की लालसा कितनी? पश्चिम का नारीसशक्तिकरण कुशल सशक्त चरित्र वान पीढ़ी को कैसे जन्म दे सकता है? भारतीय आदि संस्कृति मेँ 'गर्भाधान' शब्द के साथ 'संस्कार' शब्द जोड़ कर आखिर 'गर्भाधान संस्कार' की अवधारणा क्योँ प्रस्तुत की गयी? वहाँ तो SEX का प्रयोग सन्तान के लिए बताया गया है नारी शक्ति को मातृशक्ति मानकर सम्मानित किया गया है. लेकिन अब राजपूतकाल से नारी स्वयं अपनी शक्ति से अन्जान है और रमणी की भाँति बनी रहना चाहती हैँ खैर.......महिला दिवस के उपलक्ष्य पर हम अपाला, गार्गी ,घोषा, सावित्री, पन्ना धाय ,जीजाबाई, रजिया सुल्तान ,किरण वेदी, आदि को शत -शत- नमन .!.....JAI HO.....OM...AAMEEN.

शनिवार, 20 फ़रवरी 2010

वेलेँटाइन वीक स्पेश��

हिन्दुस्तान मेँ वेलेँन्टाइन वीक स्पेशल पर आप का लेख सराहनीय था हालाँकि इस विषय पर मेरे विचार हैँ कि वास्तव मेँ जीवन ही उत्सव है आज की अन्ध भागदौड़ मेँ पर्व मात्र औपचारिकता रह गये है इन पर्वोँ से सिद्ध होता है कि जो आचार विचार भाव सात्विकता आदि पर्वोँ पर बनाने का प्रत्यन करते हैँ वह तो दैनिक दिनचर्या होनी चाहिए थी उसे हम भूल चुके हैँ.जो भूले नहीँ भी हैँ वे आज की भौतिक वादी दौड़ मेँ कहाँ पर हैँ? यहाँ बात प्रेम की है किसका प्रेम से साक्षात्कार है? जिसका प्रेम से साक्षात्कार हो जाता है उसका जीवन ही उत्सव हो जाता है.वह औरोँ को कष्ट नहीँ दे सकता.वह द्वेषभावना ईर्ष्या आदि नहीँ रखता.जहाँ ऐसा है भी वहाँ प्रेम नहीँ होता प्रेम मेँ तो अपनी इच्छाएँ नहीँ सामने वाली की इच्छाएँ महत्वपूर्ण हो जाती हैँ. antaryahoo.blogspot.com

सुप्रबन्धन के वास्ते!

देश के समक्ष प्रमुख समस्याएँ हैँ-भ्रष्टाचार एवं कुप्रबन्धन .नियुक्ति प्रक्रियाओँ मेँ भारी ब दलाव के साथ विभिन्न नियुक्तियोँ के लिए नारको परीक्षण एवं ब्रेन रीडिँग अनिवार्य होना चाहिए.दूसरी ओर महिला आरक्षण एवं आरक्षण व्यवस्था पर पुनर्विचार की आवश्यकता है.आरक्षण व्यवस्था समानता की व्यवस्था नहीँ असमानता की व्यवस्था है.हाँ ऐसा तो होना चाहिए किआरक्षण के दायरे मेँ आने वाले अभ्यार्थियोँ को पहले वरीयता दी जाए यदि वे सभी मानक पूरे करते होँ.मातापिता बनने के अधिकार पर भी काऩून बनना चाहिए.आज 70 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के शिकार है तो क्या इसके लिए अभिभावक दोषी नहीँ है?हमे विचार करना चाहिए कि हमारे वैदिक विद्वानोँ को 'गर्भाधान' शब्द के साथ 'संस्कार' शब्द जोड़ 'गर्भाधानसंस्कार' के अवधारणा की क्या जरूरत थी?उन्होँने तो विवाह एवं परिवार का उद्देश्य तक धर्म माना है.इस सब पर विचार कर भावी आश्रम पद्धति अधिनियम पर सोँचना चाहिए. जहाँ पर्यावरण,नैतिकता का वातावरण हो.जो नारको परीक्षण ब्रेन रीडिंग एवं भावी 'माता पिता बनने के अधिनियम' पर खरा न उतरे उन्हेँ जहाँ रखा जाए और कुटीर तथा शिल्प कला के माध्यम से व्यवसायी बनाया जाए.प्रत्येक युवक के लिए स्नातक के बाद 5 वर्ष के लिए सैन्य प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाए. ASHOK KUMAR VERMA 'BINDU' akvashokbindu@yahoo.in antaryahoo.blogspot.com #9452874748

सुपोषण बनाम कुप्रबन्धन

सभी समस्याऔँ की जड़ है हमारा मन.कुपोषण के लिए भी हम सब का मन दोषी है.किसी ने ठीक ही कहा है कि सभी को माता पिता बनने का अधिकार नहीँ होना चाहिए.अब हम धर्म अर्थ काम मोक्ष मेँ सन्तुलन की कला से अन्जान हो गये हैँ. हम भूल गये है कि हमारे सनातन विद्वानोँ नबियोँ ने गर्भाधान शब्द के साथ संस्कार शब्द जोड़ कर गर्भाधानसंस्कार शब्द की अवधारणा क्योँ प्रस्तुत की थी?वर्तमान मेँ अपने जीवन को हम सब सार्वभौमिक मानकोँ या कानून के आधार पर बेहतर बना नहीँ पाते किसी को पति या पत्नी बनाने या बच्चे पैदा करने के कर्म से जुड़ जाते हैँ.आज 70प्रतिशत बच्चे कुपोषण के शिकार है इसके लिए माता पिता के अलावा को दोषी है?हमारे आदि विद्वानोँ ने तो विवाह एवं सन्तानोत्पत्ति का उद्देश्य तक धर्म बताया है वहीँ आज हम सब काम मेँ जीते है.हमारे मन धर्म मेँ नहीँ काम मेँ जीता है. "अशोक कुमार वर्मा बिन्दु" akvashokbindu @yahoo.in antaryahoo.blogspot.com #9452874748

I WANT TO ADDRESS Mr.BARAK OBAMA

Hope that your presence as an American president will solve allthe problems such as terrorism and violence,prevailing in india,tibbet, immediate actions in support of good health, human riggts,women rights and happy life on earth by rising beyond castism,racialism, sex and regionalism. in this contect,we happen to remember the statement of an young buddhist saint named AAGYEN TRINLEY DORJEY 'KARMAPA LAMA',that by joining a great nation like America, he would succeed in bringing peace in the world. we should always be ready with heart and soul for good life, health and world-peace. for which, we should forget our differences and narrow-mindedness and regionalism. india and whole world has great expectations from you. the terrorists believing in seperation neither remained silent, nor will ever be . so,we are expected to have control upon them in all ways. The remaining part in the next letter. ASHOK KUMAR VERMA 'BINDU' www.antaryahoo.blogspot.com #9452874748

: शेर के मुँह खान

महाराष्ट्र की राजनीति मेँ जो हो रहा है वह राष्ट्रीयता के परिपेक्ष्य मेँ ठीक नहीँ हो रहा. प्रजातन्त्र मेँ आखिर दबंगवाद एवं क्षेत्रवाद के खिलाफ बिगुल कब बजेगा?मुम्बई मेँ मराठा बनाम हिन्दी की जो क्षेत्रवादी राजनीतिक खेल चल रहा है आखिर कब बन्द होगा ?इससे इतना जरूर है कि राष्ट्रीयता पर भी दृष्टि गयी है.हालाँकि आम आदमी मेँ भी क्षेत्रीयता की बू आ रही है .यहाँ तो हर मन विभक्त है. अशोक कुमार वर्मा 'बिन्दु' akvashokbindu@yahoo.in antaryahoo.blogspot.com #9452874748

REGISTER: दहेज:दोषी कौन?

दहेज के 90प्रतिशत केस फर्जी होते हैँ मेरा अन्वेषण इसके लिए वधु या वधुपक्ष को भी मानता है शादी तय होने वक्त या दाम्पत्य जीवन मेँ मानवीय मूल्योँ को महत्व न दे निर्जीव वस्तुओँ को महत्व देना रिश्तोँ के बीच कब तक सहजता बनाये रख सकता है?दहेज के 90प्रतिशत केस मेँ वधु या वधु पक्ष ही दोषी है .यह पर्दे के पीछे का सच है. दर असल समाज अपनी आत्मा खो चुका है हमारे आदि विद्वानोँ ने तो शादी एवं परिवार का उद्देश्य धर्म माना था न कि काम.बुद्ध ने कहे दुख का कारण तृष्णा 'काम 'है. अशोक कुमार आ .ब .वि. इण्टर कालेज. कटरा शाहजहाँपुर. akvashokbindu@gmail.com antaryahoo.blogspot.com