सोमवार, 22 फ़रवरी 2010

22फरबरी:कस्तूरबा पुण्�� दिवस

प्रकृति मेँ अकेला तत्व स्वयं मेँ क्या है? विभिन्न तत्वोँ मेँ सन्तु लन -असन्तुलन से ही प्राकृतिक घटनाएँ है . जो आकर्षण -प्रतिकर्षण के बिना असम्भव है. प्रकृति मेँ मानव सत्ता महत्व पूर्ण है, जिसके दो ध्रुव हैँ- नारी एवं पुरूष . नर- नारी एक दूसरे के लिए परस्पर श्रेष्ठ सहज एवं नैसर्गिक मित्र हैँ लेकिन हमारी कुण्ठित, लिँगभेदी और भोगवादी सोँच ने नर -नारी सम्बन्धोँ के बीच अनेक संदिग्ध सवाल तथा भ्रम पैदा कर दिए हैँ. किसी ने कहा है कि जिसे पति या पत्नी के रूप मेँ यदि सच्चा मित्र मिल जाता है तो उसका जीवन धन्य हो जाता है. श्रेष्ठ पतिव्रता महिलाओँ मेँ से एक नाम है- कस्तूरबा गाँधी का .11 अप्रैल 1869 को जन्मी कस्तूरबा का अपने पति कर्मचंद्र गाँधी को काफी सहयोग रहा .बाल विवाह के बावजूद इन्होँने शुरू से ही अपने दायित्वोँ को भली -भाँति निभाया. अपने आखिरी दिनोँ मेँ अपनी अस्वस्थता के बाबजूद साहस एवं सँयम से काम लिया. हालाँकि वे महात्मा गाँधी की मृत्यु से लगभग 4 वर्ष पहले दुनिया से गुजर गयीँ लेकिन उनका गाँधी -आन्दोलन मेँ महत्वपूर्ण योगदान रहा. हमेँ सीख लेना चाहिए कि स्थूलताओँ (शरीर एवं वस्तुओँ )के विकारोँ -रोगोँ से घबराना नहीँ चाहिए. स्थूलता वैसे भी परिवर्तन शील है और यही प्रदूषण का कारण है ,जो कि दो प्रकार का होता है -कृत्रिम एवं प्राकृतिक .यदि हम अपने मन को ऊपर से और विकृत कर लेँ तो विकार एवं समस्याएँ बढ़ती ही है. हमेँ अपना धैर्य एवं साहस कदापि नहीँ खोना चाहिए और हर हालत मेँ पुरुषार्थ के चारोँ स्तम्भ धर्म अर्थ काम मोक्ष मेँ सन्तुलन बनाये रखना चाहिए और फिर परहित ही धर्म है ........JAI HO....OM...AAMEEN.

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