शनिवार, 20 फ़रवरी 2010

सुप्रबन्धन के वास्ते!

देश के समक्ष प्रमुख समस्याएँ हैँ-भ्रष्टाचार एवं कुप्रबन्धन .नियुक्ति प्रक्रियाओँ मेँ भारी ब दलाव के साथ विभिन्न नियुक्तियोँ के लिए नारको परीक्षण एवं ब्रेन रीडिँग अनिवार्य होना चाहिए.दूसरी ओर महिला आरक्षण एवं आरक्षण व्यवस्था पर पुनर्विचार की आवश्यकता है.आरक्षण व्यवस्था समानता की व्यवस्था नहीँ असमानता की व्यवस्था है.हाँ ऐसा तो होना चाहिए किआरक्षण के दायरे मेँ आने वाले अभ्यार्थियोँ को पहले वरीयता दी जाए यदि वे सभी मानक पूरे करते होँ.मातापिता बनने के अधिकार पर भी काऩून बनना चाहिए.आज 70 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के शिकार है तो क्या इसके लिए अभिभावक दोषी नहीँ है?हमे विचार करना चाहिए कि हमारे वैदिक विद्वानोँ को 'गर्भाधान' शब्द के साथ 'संस्कार' शब्द जोड़ 'गर्भाधानसंस्कार' के अवधारणा की क्या जरूरत थी?उन्होँने तो विवाह एवं परिवार का उद्देश्य तक धर्म माना है.इस सब पर विचार कर भावी आश्रम पद्धति अधिनियम पर सोँचना चाहिए. जहाँ पर्यावरण,नैतिकता का वातावरण हो.जो नारको परीक्षण ब्रेन रीडिंग एवं भावी 'माता पिता बनने के अधिनियम' पर खरा न उतरे उन्हेँ जहाँ रखा जाए और कुटीर तथा शिल्प कला के माध्यम से व्यवसायी बनाया जाए.प्रत्येक युवक के लिए स्नातक के बाद 5 वर्ष के लिए सैन्य प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाए. ASHOK KUMAR VERMA 'BINDU' akvashokbindu@yahoo.in antaryahoo.blogspot.com #9452874748

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