शनिवार, 20 फ़रवरी 2010

: शेर के मुँह खान

महाराष्ट्र की राजनीति मेँ जो हो रहा है वह राष्ट्रीयता के परिपेक्ष्य मेँ ठीक नहीँ हो रहा. प्रजातन्त्र मेँ आखिर दबंगवाद एवं क्षेत्रवाद के खिलाफ बिगुल कब बजेगा?मुम्बई मेँ मराठा बनाम हिन्दी की जो क्षेत्रवादी राजनीतिक खेल चल रहा है आखिर कब बन्द होगा ?इससे इतना जरूर है कि राष्ट्रीयता पर भी दृष्टि गयी है.हालाँकि आम आदमी मेँ भी क्षेत्रीयता की बू आ रही है .यहाँ तो हर मन विभक्त है. अशोक कुमार वर्मा 'बिन्दु' akvashokbindu@yahoo.in antaryahoo.blogspot.com #9452874748

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