शनिवार, 6 मार्च 2010

कब धरती आतंकविहीन?

हिन्दुस्तान मेँ आप( राम चन्द्र गुहा जी) का लेख 'कैसे खत्म होगी माओवादी हिँसा?'प्रकाशित हुआ. आप कैसे लेखक हैँ?हम जैसा अदना प्रकाशित होने को व्याकुल लेखक आपको हर प्रश्न का उत्तर दे सकता हूँ.हमेँ अनेक लेख पढ़ कर हँसी आती है और मीडिया वालोँ की नियति पर भी.खैर..... मैँ आप से पूछना चाहता हूँ कि कब धरती आतंक से विहीन हुई है?हाँ,ऐसा तो हुआ है कि आतंक नये नये रूप धारण कर आता रहा है. 6 साल पहले की बात है मेरे बाये पैर मेँ दर्द प्रारम्भ हो गया .मैँ लँगड़ाकर चलने लगा.एक एलोपैथिक डाक्टर की शरण गया .जब तक दवायी का असर रहता दर्द नहीँ होता.एक की सलाह पर पैर की मालिश करने लगा .एक ने सलाह दी कि वैसाखी का सहारा लो मैँ वैसाखी का सहारा लेने लगा.जितने मिलते उतनी सलाह प्राप्त होती.लेकिन कोई लाभ प्राप्त नहीँ हो रहा था.रोग विशेषज्ञ के पास जाने की हिम्मत विभिन्न जाँच कराने अधिक रुपये खर्च करने, समय व्यय ,आदि की हिम्मत नहीँ हो रही थी.जब हिम्मत जुटायी तो.......?!विभिन्न जाँचोँ के बाद जाँघ के एक छोटे आपरेशन के बाद मैँ ठीक होगया. देश एवं विश्व की समस्योँ मूल जड़ तक पहुँचे बिना हम समस्याओँ से मुक्ति नहीँ पा सकते. आखिर कब धरती आतंक से विहीन हुई है?

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