सोमवार, 8 मार्च 2010

व्यक्तित्व निर्माण क��� भूमिका

व्यक्तित्व निर्माण से बढ़कर जीवन मेँ अन्य निर्माण क्या है? हम जीवन मेँ किन विकल्पोँ पर प्रथम ध्यान देँ,यह हमारे एवं परिवार के भविष्य निर्माण पर टिका है.सबसे बढ़ा धन है-स्वास्थ्य . कुछ लोग जमीन जायदाद धन लोलुपता आदि मेँ अन्धे होकर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से अपने या परिजनोँ के स्वास्थ्य उत्साह उम्मीद आदि के साथ खिलवाड़ करते रहते हैँ . विशेषज्ञोँ या डाक्टरोँ की सलाह पर कार्य करते रहते हैँ . खुश मिजाज या विवेकपूर्ण गम्भीर बनने की कला से अन्जान होते हैँ . किसी ने कहा है कि जो वर्तमान मेँ असन्तुष्ट है , सोँच मेँ मत भेदोँ से भरा है,खिन्ऩता आदि बनाता जा रहा है-वह भविष्य के लिए कितना भी भौतिक आधार मजबूत कर ले लेकिन नम्रता धैर्य परोपकार आदि धारी मन के बिना वह जीवन मेँ शान्ति व सन्तुष्टि प्राप्त नहीँ कर सकता . यह अपनी आवश्यकताओँ व दूसरे की आवश्यकताओँ मेँ सामज्स्य करने मेँ असफल होते हैँ .

व्यक्तित्व निर्माण के लिए परिवार का खुश मिजाज एवं शान्तिपूर्ण वातावरण, व्यक्ति सम्मान, उदारता, स्वास्थ्य जागरूकता ,अध्यात्म, आदि की आवश्यकता होती है.
व्यक्ति की वास्तविक सम्पत्ति- उत्साह ,धैर्य, साहस ,आत्मबल, नम्रता ,आन्तरिक आनन्द ,शान्ति,आदि होती है न कि अन्य निर्जीव वस्तुएँ ;वे तो मात्र संसाधन हैँ.

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