शनिवार, 6 मार्च 2010

बच्चोँ -युवकोँ को भड़काने का लाँच्छन

कौन माता पिता आखिर अपने बच्चोँ को सत्य अन्वेषण तथा धर्म के पथ पर देखना चाहता है? ऐसा जो करता भी है उसके खिलाफ उठ खड़े होते हैँ माता पिता अध्यापक एवं अन्य.सुकरात के साथ क्या हुआ?उसने 17 साल की अवस्था मेँ अपने स्वतन्त्रता की घोषणा कर दी थी.उसका सत्य से साक्षात्कार हो चुका था.अब वह अन्य के सामने सत्य रखने लगा तो दबंगवाद और सत्तावाद उसके खिलाफ उठ खड़ा हुआ.उस पर बच्चोँ एवं युवकोँ को भड़काने का आरोप भी लगाया जाने लगा. मैँ भी बच्चोँ युवकोँ को भड़काने का काम करता हूँ-कहता हूँ कि जरूरी नहीँ की माता पिता का कहना मानो या भीड़ की चाल चलो,महापुरूषोँ का कहना मानो,कानून का कहना मानो .

कोई टिप्पणी नहीं: