मंगलवार, 30 नवंबर 2010

लघु कथा:शिक्षा के करी��

शिँक्षा नाम की एक युवती अपने परिवार व समाज मेँ अलग थलग पड़ गयी थी.दोष उसका इतना कि परिवार व समाज उससे जो उम्मीदेँ रखता , उस पर वह खरी नहीँ उतरती .बस,उसकी नजर मेँ था ग्रन्थोँ व महापुरुषोँ का दर्शन.



सन 2010ई0 की 19 नवम्बर,इन्दिरा गांधी जयन्ती ! दूसरी ओर एच टी लीडरशिप समिट कार्यक्रम ! जिसको सम्बोधित कर रहे थे -मानव संसाधन विकास मन्त्री कपिल सिब्बल.


कि-



" हमेँ यह तय करना होगा कि अपने संस्थान मेँ हम किस तरह के छात्र तैयार करना चाहते हैं.शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए पाठ्यक्रमोँ मेँ बदलाव के साथ शिक्षकोँ को भी प्रशिक्षित करना होगा . "



'शिक्षा' अब 'अकेला चल सिद्धान्त ' के आधार पर अपना जीवन जीने लगी थी.वह अब अपने सर आलोक वम्मा के मिशन को समझ चुकी थी.


कि-

"चाहें कोई कुछ भी कर रहा हो , हमे अपने लक्ष्य व कर्त्तव्योँ को नहीँ भूलना. "



मैँ शिक्षा के साथ बरेली महानगर स्थित एक शैक्षिक संस्थान 'बासवाणी अकादमी' के सेमीनार मेँ उपस्थित था.



रविवार,21 नवम्बर 2010 ई0 ! गुरु नानक जयन्ती व गंगा स्नान पर्व !




" मन चंगा तो कठौती मेँ गंगा. "



मानवीय प्रदूषण भी तीन तरह से है -मन,वचन व कर्म से.सिर्फ गंगा नहाने से क्या होता है?जब तक मन,वचन व कर्म से न नहाये अर्थात अपने मन,वचन व कर्म को पवित्र न किया?



ब्राहमणत्व का मैँ समर्थक हूँ लेकिन ब्राह्मणवाद का नहीँ जो कि चारोँ वेदोँ के खिलाफ मानता हूँ मैँ.



मैँ जिस कालेज मेँ कार्य कर रहा हूँ ,वहाँ कुछ व्यक्ति धर्म स्थलोँ की यात्रा पर काफी विश्वास रखते हैँ लेकिन.....


वे क्या आम आदमी से हट कर हो गये हैँ ? साधारण से असाधारण हो गये हैँ? वे धर्म मेँ हमेँ नजर नहीं आते,यहाँ तक कि वे ही क्या अन्य भी धर्म मेँ नजर नहीं आते . सब के सब सम्प्रदाय व उन्माद में नजर आते हैं.



शिक्षक होने के नाते हमारा क्या लक्ष्य व कर्त्तव्य होना चाहिए ? जब गृहस्थ व निरा भौतिक भोगवादी जीवन जीने वाले शिक्षक होवेंगे तो क्या होगा ? अब यह आचार्य(अपने आचरण से भी शिक्षित) न होंगे तो क्या होगा?ज्ञान ,शिक्षा व आदर्शोँ से इनका वास्तव मेँ कितना सम्बन्ध होता है?वैसे ही आज अभिभावक व विद्यार्थी है.शिक्षा को जीवन मेँ नहीँ उतारना ,बस रट कर या कैसे भी परीक्षा मेँ बेहतर अंक लाना है. युधिष्ठर जैसे विद्यार्थियोँ को अब भी अपना पाठ याद करने मेँ वक्त लगे लेकिन अब तो गुरु ही उनके खिलाफ माहौल बना देते है.



ASHOK KUMAR VERMA'BINDU'

1 टिप्पणी:

arvind ने कहा…

सब के सब सम्प्रदाय व उन्माद में नजर आते हैं.

....bilkul sahi baat kahi hai aapne...sahamat.