बुधवार, 23 मार्च 2011

23मार्च 'शहीदी दिवस 'पर भ्रष्टाचार व काले धन ��े खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान !

बताया जा रहा है कि 400लाख करोड़ रुपये काला धन के रुप मे विदेश मे जमा है. यदि यह धन भारत आ जाए तो देश की स्थिति क्या होगी ?



देश के अन्दर 6लाख38हजार 365 गाँव हैँ .यदि कैस भी यह काला धन भारत आ जाए और प्रत्येक गाँव को एक एक करोड़ ही रुपया दे दिया जाए तो गाँव का विकास सम्भव हो जाएगा.वापस आये इस काले धन से प्रत्येक गरीब परिवार के नाम पर अर्द्धसरकारी उपक्रम,कुटीर लघु उद्योग,आदि स्थापित कर भारत को पुन:सोने की चिड़िया बनाया जा सकता है.



स्वामी रामदेव व उनके सहयोगियों के इस अभियान मे यदि देश के नागरिक सहयोग नही करते है तो यह भविष्य मे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए सवसे बड़ा अफसोस होगा.


प्रत्येक नागरिक को इस अभियान प्रति समर्पित होना ही चाहिए.एक बार जय गुरुदेव व उनके शिष्य राजनीति मे कोशिस कर चुके हैं लेकिन क्या हुआ?जब मैं स्वामी रामदेव के अभियान की बात करता हूँ तो लोग कहते है कि देश के कुप्रबन्धन व भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई मे कोई रुचि न रख कर अब भी गुलामी मानसिकता पर चोट करनी होगी लेकिन वह चोट ऐसी हो कि आम आदमी उल्टा हमारे खिलाफ ही न हो जाए.



देश की जनता जाति,मजहब,क्षेत्रवाद व अन्य संकीर्णताओं मे अब भी उलझी है. अब भी वह चन्द् लोभ मे आ कर अपने वोट का सौदा कर बैठती है. इस पर स्वामी रामदेव बाबा को विचार करना चाहिए.बिना त्याग समर्पण के अभियान तेज होने वाला नहीँ. मै लोगो से स्वामी रामदेव बाबा के अभियान मे सहयोग की बात करता हूँ तो वे अपनी मजबूरियाँ गिना देते हैं.अपनी मजबूरियाँ गिनाने वाला कभी भी देश ,धर्म व कर्त्तव्य प्रति सजग नहीं हो सकता है.उसको झकझोरने के लिए काफी ओज चाहिए.जो विभिन्न संकीर्णताओं को बहा ले जाए .


हर कोई देश मे भगत सिह तो चाहता है लेकिन अपने घर मे नही . सभी गाण्डीव रखे अर्जुन की तरह माया मोह मे फँसे हुए है.



समाचार पत्रों ने आज प्रकाशित किया-'आज से शुरु होगा जाटों का गुरिल्ला आन्दोलन . 'देश का प्रजातन्त्र अब भी भीड़तन्त्र व स्वार्थतन्त्र के रुप में
विराजमान है.जिसका वोट की राजनीति पक्ष लेती दिखती है.ऐसे मे देश के हित मे कठोर निर्णयों के लिए जनता को एक मत करना बड़ा मुश्किल काम है.



आज 23मार्च !


आज के ही दिन सन 1931 ई0 में भगत सिंह ,राजगुरु व सुखदेव,आदि जैसे क्रान्तिकारियों की लड़ाई भी कुप्रबन्धन के खिलाफ थी न कि सिर्फ ब्रिटिश शासन के खिलाफ ही.देश मेँ अब भी कुप्रबन्धन के खिलाफ अनेक शहादतों की आवश्यकता है.इस नजरिये के साथ जब तक हम भ्रष्टाचार व काले धन के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान में नहीं जुड़ते तब तक हम भावी पीढियों के लिए प्रेरणा स्रोत व मार्ग दर्शक नहीं बन सकते.इसलिए हमें राष्ट्र के प्रति अपने कर्त्तव्यों के प्रति सजग होना आवश्यक है.




ASHOK KUMAR VERMA'BINDU'



A.B.V.INTER COLLDGE,


MIRANPUR KATRA,


SHAHJAHANPUR,

U.P.

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