मंगलवार, 15 मार्च 2011

26जनवरी2009ई0

सोमवार,

मौनी अमावस्या !


26जनवरी !


राष्ट्र से जुड़ा दिन है.



गणतन्त्र हमारा कैसे गुणतन्त्र बने ?


इस पर हमे विचार करना है,

उस पर चलना है.


26जनवरी!


26जनवरी,मेरे ख्वाब से जुड़ा दिन है.


उस ख्वाब के लिए


उस स्वपन के लिए


जिसके लिए मैने 12 वर्ष जमाने की नजर से बर्बाद किए

लेकिन


मेरा कुछ भी बर्बाद नहीं हुआ है.



जो बर्बाद होने के योग्य है


वही बर्बाद होता है.


यह शरीर तभी तक ही सजीव है


जब तक इसमे श्वास चल रही है.


इन 12 वर्षों......?!

खैर छोड़ो !


आज गणतन्त्र दिवस!



कालेज पहुंच कर मैने श्यामपट पर दो वाक्य लिख दिए-


"व्यक्ति के धर्म संस्कार एवं सभ्यता की पहचान उसकी स्वतन्त्रता मे ही होती है दबाव या मजबूरी मे नहीं "


और-


"आओ संकल्प लें गणतन्त्र को गुणतन्त्र बनाने का."


* * *


23 नवम्बर 2008से मै तनाव मे जी रहा हूँ,लगातार तनाव मे जी रहा हूँ.मैं एक षड़यन्त्र मे फँसता खुद को महसूस करने लगा था.अपने को नितान्त अकेला महसूस कर रहा था.मेरे माता पिता भी मेरे मदद मे नहीं थे.जिसके स्मरण मात्र से मैँ अपनोँ
को पराया समझने लगा था.दुनिया मेँ किसे कहूँ अपना ?उन्हेँ जो कहने को तो अपने हैं लेकिन वे हमें समझ न सके?
हमारे हित के नाम पर हमेँ उनसे घुटन बेचैनी ही मिली है
लेकिन....



दुख क्यों ?

इच्छाओं के कारण.


उम्मीदों के कारण.


चैन तभी मिलता है जब न ही किसी को अपना न ही पराया समझूँ.


स्वयं की समस्याओँ का निदान स्वयं ही खोजना होगा अन्य तो समस्याओं को उलझने के लिए ही हैं.


आज 26जनवरी!


शहीदों को मेरा नमन !

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