गुरुवार, 10 मार्च 2011

बिन्दुसार कौटिल्य की डायरी से

*चुनौती*


यदि दम है उनमे ,

निकल कर दिखायें मेरे दिल से

चुकने का नाम नही मोहब्बत,

बढ़ती ही जाए मोहब्बत.


खत्म हो जाए जो,

वो भी क्या है यारो मोहब्बत

वो न करे हमसे मोहब्बत तो क्या,

हमे तो है मोहब्बत.


मेरे दिल से जुदा करके तो

दिखाये वे मोहब्बत


यदि दम है उनमे ,

निकल कर दिखाये मेरे दिल से.




*.....क्या है दम ?! *


मेरा प्यार क्या प्यार नही,

कूड़ा करकट है

जी रहा तेरी याद ले

मर भी जाऊँ तेरे याद मे.


तू है कितने दमखम मे

मै भी जरा देख लूँ

खुद को निकाल कर तो

दिखा मेरे दिल से.

......क्या है दम ?!




* किसकी जरूरत थे हम*


किसकी पसन्द मे थे हम,

किसकी नजर मे थे हम

किसकी जरुरत थे हम,
किसके दिल थे हम.



*निशानियाँ....*


जिनके दिल मेँ हम नही है

वो हमे क्या याद करेगे ;


जो हमारे दिल मे है

उनके लिए निशानिया छोड़ जाएंगे.



*यादों के साये....*


मेरी जिन्दगी मे लोग आ आ के चले गये

मगर हम अब भी यादों के साये मे जी रहे.



*जताना न आया*


हमने याद किया जग को

किसने याद किया हमको;

अफसोस यही सिर्फ है यारो

जताना न आया हमको.



* सौदेबाजी न की*


बहुत आये मगर मैने

सौदेबाजी न की


बिकने को तैयार था

नहीं मै;


किसी के आँखो मे चमक वो न देखी

मोहब्बत मेँ दीवानी जिन्दगी न देखी.



*सपने सच नही*


कोई हमे स्वीकारता तो तारे भी तोड़ लाते


कोई हमसे मोहब्बत करता तो उसपे मरते.


क्या क्या ख्वाब थे
उन्हे सहज रखने के

हम उन्हे रखते हर वक्त पलकों पे.




*मिलना अगले जन्म*



चलो कोई बात नही पूरी हो चाहतें तुम्हारी


मेरी न कोई चाहत है मोहब्बत के सिवा.


चाहे मोहब्बत मेरी

खुश रहो तुम सदा


हम तो अब चल दिये

मिलना अगले जन्म.



ख्वाब थे नसीब मे

वे भी मिट रहे


मौत अब करीब है

मगर बेचैन है.


अगले जन्म मे जरुर तुम संग होगे

पा तो लिया ही मन
से हमने तुम्हे.




*चलते चलते फिर....*



यदि दम है उनमे

निकल कर दिखाये मेरे दिल से





बिन्दुसार कौटिल्य कौन?


जानेगे भविष्य में.



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www.orkut.com/ASHOK KUMAR VERMA

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