रविवार, 13 मार्च 2011

मेरा जीवन मेरे सपने:ब��न्दुसार कौटिल्य

कुण्डलिनी व योग विज्ञान में प्रथम चार अवस्थाओं का अपने निज(प्राण)तक पहुचने मे बड़ा महत्व होता है.यह प्रथम चार अवस्थाएं है-स्थूल,भाव,सूक्ष्म और मनस.जिनको साधना आवश्यक है जो कि योग के प्रथम पांच अंग-यम,नियम,आसन,प्राणायाम व प्रत्याहार के बिना असम्भव है.कुछ को साधना मे विशेष मेहनत नही करनी पड़ती इसका कारण उनका नजरिया व अन्तर्प्रवृत्ति होती है तब मेण्टल शरीर की प्राकृतिक सम्भावनाएं कल्पना व स्वपन क्रमश:संकल्प व अतीन्द्रिय दर्शन मेँ परिणित होने मे देर नहीं लगती ,एस्ट्रल बाडी की प्रकृति सम्भावनाएं सन्देह व विचार क्रमश:ऋद्धा व विवेक मे परिणित हो जाता है.जो अपने को अन्तर्मुखी व वहिर्मुखी दोनो स्थितियों में लाने की कला से परिचित होता है वही वास्तव मे सफलता पा सकता है. मैँ उसे स्वपन कहूं या अतीन्द्रिय दर्शन...?मेरे कुछ स्वपन यथार्थ से जुड़े दिखे हैँ.वे हमे दिशा निर्देशित भी करते रहे हैं. लेकिन उन पर पूर्ण विश्वास व जग चमक प्रभाव कारण अपने जीवन मेँ उन पर अमल नही कर पाते.





श्री अर्द्धनारीश्वर शक्तिपीठ ,नाथ नगरी,बरेली(उ प्र) के संस्थापक श्री राजेन्द्र प्रताप सिंह (भैया जी) का मानना है कि अपने अन्दर उपस्थित नारी शक्ति को जब हम जगा लेते है, नगेटिव व पाजटिव शक्ति अर्थात निष्क्रिय व सक्रिय शक्ति का अपने शरीर के अन्दर सम्भोग करा लेते हैं तो चारो स्तरोँ को पार कर स्व तन्त्र पर आ जाते हैं.


हमने अनेक सम्भावनाओं को मन मे जिया है,ऐसे मे हमसे लोग कहते है कि तुम तो कहते थे कि अमुख काम पहले बार किया है लेकिन लगता है कि ऐसा पहले भी कर चुके हो.विभिन्न सम्भावनाओ को मन मे जीने से हम बुरी आदतों से भी मुक्त हो सकते है.मानो हमने सोसायटी मेँ पड़ कर एक बार शराब पी,एक बार ही शराब पीने की घटना से हमने जीवन भर के लिए मानसिक स्थितियां जी लीं कि अरे,यही दारु का मजा है ? चलो एक बार पी ली सारे जीवन के लिए काफी है.अब हम दारु से मुक्त हुए.इस की लत से क्या फायदा?इसी तरह सांसारिक अन्य विषयों के लिए भी.



*मेरे सपने....?*


(1)पांच साल पहले तक मै एक मकान स्वपन मे देखा करता था. चार साल पहले उस मकान मे एक फैमिली आकर रहने लगी ,जिसके मेम्बरस मे एक युवती भी शामिल थी.उस फैमिली के आने के बाद मैने फिर वही मकान स्वपन मे देखा,स्वपन मेँ उस युवती के साथ सम्भोग किया.इस स्वपन को देखने के बाद फिर कभी स्वपन मेँ इस मकान को नहीं देखा.



(2)किशोरावस्था से ही मैँ एक स्वपन मेँ एक अन्य मकान देखता था जिसमे मै एक लड़की की तलाश मेँ रहता था लेकिन लड़की जीप को ड्राइव कर मकान से बाहर निकल जाती थी.जब मै01जुलाई2004ई0 को कटरा (KATRA)आया तो मेरे साथ कुछ ऐसी घटनाएं घटीं जिनका मुझे पूर्व एहसास हो जाता था.एक मैँ दिन एक गली मे पहुचा ही कि मुझे लगा कि मै यहां आ चुका हूँ .फिर आगे बढ़कर मै जिस मकान को देखा तो आश्चर्य,यह सब तो मै स्वपन मेँ देखता रहा हूँ.इसके मै जो जो पूर्व अनुमान लगाता गया ,वह जीवन में घटता चला गया .

(3)इसी तरह एक रात मैने स्वपन मे एक जीप को सड़क पर पलटा देखा ,साथ ही दो लाशें भी देखी.सुवह मै तैयार हो शाहजहाँपुर जाने के उद्देश्य से घर से बाहर निकला.सड़क पर आते ही मुझे एक जीप मिल गयी लेकिन मै उससे उतर पड़ा.एक बालक आकर हमसे बोला "पापा बुला रहे है हम लोग साथ साथ ही चलेगे."
जब बाद मेँ हम उस बालक व उसके पिता जी के साथ दूसरी जीप से शाहजहापुर जा रहे थे तो आगे मध्य रास्ते पर देखा पहली जीप दुर्घटनाग्रस्त हुई पड़ी थी.

(4)मुझे अपने आस पड़ोस मे एक दो आत्माओ का एहसास होता रहा है लेकिन दो वर्षो से ऐसा नही है.दो वरस पहले एक मैने एक स्वपन देखा कि हमसे एक युवक कह रहा है कि यह सफेद कपड़ा हटाओ.एक सफेद कपड़ा मै एक पेड़ पर टंगा देख रहा था.
सुबह उठ कर मै मंजन करते करते मकान से बाहर आ गया.अचानक मेरी निगाह फाटक मे बँधे एक सफेद कपड़े पर गयी तो मुझे रात को देखा स्वपन याद आ गया.मै तुरन्त अन्दर आ कर मकानमालिकिन के पास पहुंचा

" चाची,बाहर फाटक पर सफेद कपड़ा कैसा बँधा है?"



"उसको हटाना नहीँ,एक बाबा जी ने बाँधते हुए कहा है कि अब कोई भूत बाधा नहीं आयेगी. "



इस तरह की घटनाओ को क्या कहा जाए?

हाँ,मै इतना जानता हूँ कि दुनिया से प्रभावित हुए बिना यदि धैर्य व संयम रखते हुए अन्तर्मुखी जीवन भी जिया जाए तो हम अपने आस पास घटने वाली घटनाओ का पूर्व एहसास कर सकते है.



शेष फिर .....



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