मंगलवार, 15 मार्च 2011

जिसपे न कोई पथिक अब यह���ँ

सुकुन खो रहा,बेचैन हो रहा



दिलो दिमाग से परेशान हुआ.



है ठिकाना नही,कही यहां



भागता फिर रहा सारे जहाँ .



आबोदाना सब हुआ मर्ज माफिक



सफर ये दिल से दिमाग तक का.



मुश्किल हुआ सफर यहाँ


दिलोदिमाग से परेशान हुआ.




हिन्दोस्ताँ का ख्वाब खो गया



पश्चिमी हवाओ मे खो गया.



ऋषियों मुनियों का दिया रास्ता



जिसपे न कोई पथिक अब यहाँ.


(bindusar ki dayari se)

1 टिप्पणी:

arvind ने कहा…

हिन्दोस्ताँ का ख्वाब खो गया

पश्चिमी हवाओ मे खो गया.

ऋषियों मुनियों का दिया रास्ता

जिसपे न कोई पथिक अब यहाँ.
gahari baat.