मंगलवार, 22 मार्च 2011

अपना कर्त्तव्य क्यों निभाएं ?

जानते नही कलियुग है? ईमानदारी पर उतर आये तो रोटी मिलना भी मुश्किल हो जाएगी.हम कर्त्तव्य का पालन क्यो करे?आज कल तो सुविधाजनक व अवसरवादिता है वही ठीक है. धन्य ,आज के व्यक्ति की सोच!!




सुप्रीम कोर्ट दो बार कह चुका है कि कुप्रबन्धन व भ्रष्टाचार के लिए हर व्यक्ति दोषी है ?इसका मतलब मेरी दृष्टि मे यह है कि हर व्यक्ति के जागरुक हुए बिना देश मे दीर्घ कालीन परिवर्तन सम्भव नहीं .हर समस्या की जड़ है-मन .

मन मे सृजनात्मक सोच पैदा हुए बिना दूरगामी परिवर्तन सम्भव नही है.न जान कितनी क्रान्तियां हुईं लेकिन उसका प्रभाव कब तक पड़ा?अंगुलिमानों को बुद्ध ही बदल सकते हैं सेना व पब्लिक नहीं.क्रान्ति की तो हर पल आवश्यकता होती है .



* हम क्यो न निभाए अपना कर्त्तव्य ? *



अपने कर्त्तव्योँ का क्रान्ति से घनिष्ट सम्बन्ध होता है.शास्त्रों ने व्यक्ति के तीन कर्त्तव्य कहे हैं - अपने , परिवार व समाज प्रति कर्त्तव्य . आखिर हम अपने कर्त्तव्य क्यों न निभाएं?दुनिया मे सभी एक जैसे नही हो सकते . हम अपना कर्त्तव्य न निभा कर भावी पीढी के मार्गदर्शक व प्रेरणास्रोत तभी हो सकते हैं जब हम ईमानदारी से अपने कर्त्तव्यों का पालन करेंगे . इसके लिए हमे संघर्ष व त्याग करना ही पड़ेगा.


यहाँ पर मुझे श्री अर्द्धनारीश्वर शक्तिपीठ , नाथ नगरी , बरेली (उ प्र) के संस्थापक श्री राजेन्द्र प्रताप सिंह (भैया जी)के कहे शब्द याद आ जाते है कि एक रोज मेरे जाने का वक्त आयेगा और चला जाऊंगा छोड़कर तुम्हारी दुनिया,जिसमे तुम अपने अहंकार के वजूद को जीवित रखना चाहते हो.मगर फिर भी मुझे किसी से कोई शिकवा या गिला नहीं है,और न ही नफरत है लेकिन अहंकार मेरा परमशत्रु है............. परन्तु यह परिवर्तन की विचारधारा गंगा की निर्मल धारा की तरह अनवरत बहती रहेगी और मनुष्य युगों युगोँ तक परिवर्तन के इन प्रयासों को सफल बनाने के लिए कार्य करते रहेंगे.वर्तमान युग ने जहां हमें ओशो जैसा श्रेष्ठ व्याख्याकार दिया है वहीं दूसरी ओर आचार्य श्रीराम शर्मा जैसा वैज्ञानिक अध्यात्मवाद व यज्ञपेथी का श्रीगणेशकर्ता , श्री श्रीरविशंकर जैसा आर्ट आफ लीविंग का विस्तार जयगुरुदेव जैसा सन्त , अन्ना हजारे जैसा परिवर्तनकर्ता ,डा ए पी जे अब्दुल कलाम जैसा आदर्श पुरुष .....और भी न जाने कितने नाम.इन सब से हट कर इन तेरह साल मेँ एक और हस्ती उभर कर आ रही है ,जिस हस्ती का नाम है - योगगुरु स्वामी रामदेव. कुप्रबन्धन व भ्रष्टाचार के खिलाफ किसी को बिगुल बजाना ही था.


हमारा एक ख्वाब था -विभिन्न जातियोँ सम्प्दायोँ के देशभक्त व समाजसेवियों,सन्तोँ को एक मंच पर लाना.क्या यह कार्य योगगुरु स्वामी रामदेव के द्वारा सम्भव नहीं है?आप को इस सम्बन्द्ध मे जयगुरुदेव ,आदि से भी बात करनी चाहिए .वैसे हमे उम्मीद है कि वक्त आने पर वह भी स्वामी रामदेव के मिशन के साथ आयेंगे.श्री अर्द्धनारीश्वर शक्तिपीठ, नाथ नगरी ,बरेली (उप्र )के संस्थापक श्री राजेन्द्र प्रताप सिंह(भैया जी) से भी निवेदन है कि वे स्वामी रामदेव जी के मिशन मे सहयोग करने की कृपा करें.आपका यह मिशन हर देश भक्त का मिशन होना चाहिए.




*स्वामी रामदेव जी जरा मेरी भी सुनिए*


अपने मिशन में इण्डिया के स्थान पर भारत नामकरण,नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु सम्बन्धी दस्तावेज,अमेरीका मेँ ओशो को दिया गया थेलियम जहर व व्यवहार,मुसलमानो को साथ ले कर भारत ,पाकिस्तान बांग्ला देश व अन्य सार्क देशों को लेकर एक मुद्रा ,एक सेना ,एक संघीय सरकार,भावी विश्व सरकार ,आदि पर भावी योजना को अपने मिशन मे प्रतीक्षा सूची मे डालने की कृपा करें.


ASHOK KUMAR VERMA'BINDU'



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