बुधवार, 16 मार्च 2011

शाम भयो श्याम न आयो

शाम भयो श्याम न आयो ,श्याम न आयो


यमुना किनारे यमुना किनारे


अँखिया रे प्यासी दर्शन को

श्याम न आयो

श्याम भयो श्याम न आयो........


बड़ी भक्तन की पंक्ति

हृदयाँगन मे लो है जलती.


यमुना भयी रे फिर से कलुषित


श्याम न आयो मगर श्याम न आयो.



गोपियों से खेलन की मति कौन समझायो


मेरो बासुरी वालो कन्हेया

कभी गाय भी चरायो,


कायर जमाने को भी तू रे जगायो


शाम भयो अब फिर तू रे आयो.



रिश्तो को भी त्यागन की बात कह डारो


महानताओ के सामने रिश्तो को का विचारो.

गुरु तेगबहादुर गोविन्द ने घर ही लुटायो


तेरे सिवा इसका राज कौन समझायो.


लाशो पे रोने वाले है कायर


ये तो तू ही तो अर्जुन को समझायो.

फिर से कन्हैया तू आ जायो



शाम भयो श्याम न आयो......

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