शनिवार, 7 मई 2011

अपना पराया!

कौन है अपना कौन है पराया,

इसको मैं समझ न पाया..

जिसने खुशियों को रौंदा

जिसने शौकों को तोड़ा

उत्साह जिसने मारा,

वो नहीं अपना है वो पराया..

ग्रन्थों की बातें हैं झूठी

या इन अपनों की बातें ?


इन अपनों की बातों से उलझे

ग्रन्थों की बातों से सुलझे;

आत्म ज्ञान ने किया सबेरा,


जिसने माया मोह में फंसाया,

वो है अपना या है पराया..


जिन्होने की ग्रन्थों की बातें

उन्हें मात पिता ने भी झुठलाया

पत्नियां भी ऐसे में न अपनी

धर्म पथ पर खुद को अकेला पाया,


कौन है अपना कौन पराया..

रामानुजन गणित का दीवाना

मात पिता ने ही उसे पागल समझा


कैम्ब्रिज जा नाम कमाया

वहाँ सम्मान वहाँ अपनपन पाया

कौन है अपना कौन पराया..

अशोक कुमार वर्मा 'बिन्दु'