रविवार, 14 अगस्त 2011

सन 1947ई की स्वतन्त्रता के मायने...?

अच्छा है देश की कुछ संस्थाएं प्रतिवर्ष 15अगस्त को स्वतन्त्रता दिवस मनाती है.इस अवसर पर देश के कितने प्रतिशत नागरिक वास्तव में उत्साहित होते हैं इस पर चर्चा बाद मेँ कभी करेंगे.हमें कागजी घोड़े दौड़ाने , भाषणबाजी व कुछ सांस्कृतिक कार्यक्रमों से हट कर सन1947ई से लेकर अब तक के प्रत्येक पहलुओं पर ईमानदारी से विश्लेषण आवश्यक है.समाज मेँ प्रयोग किये जाने वाले अनेक शब्दों की तरह 'स्वतन्त्रता' शब्द के मायने अधिकतर लोग नहीं जानते. आम आदमी अभी किस दृष्टि से स्वतन्त्र है?हमें तो यही लगता है कि आम आदमी अभी स्वतन्त्रता से काफी दूर है?अपराधियों,रिश्बतखोरियों,मिलावटखोरों,दहेज एक्ट दुर्पयोगियों,आदि के खिलाफ देश मेँ शासन प्रशासन ही साहस के साथ खड़ा नहीं हो पा रहा है.दुनिया मेँ लगातार मैसेज जा रहा है भारत में सरकारें भ्रष्टाचार के खिलाफ ही कोई ठोस कदम नहीं उठाना चाहती है.देश की आजादी की नींव ही भ्रष्टाचार पर खड़ी हुई है.जिसके लिए पूर्णतया नेहरु दोषी हैँ.सरस्वती कुमार,दादूपुर,वाराणसी का कहना है कि ...इस परिवार के लोगों को अपने नाम के आगे गांधी शब्द लिखना सबसे बड़ा धोखा है.पूंजीवाद व सत्तावाद देश को लूटे.

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