मंगलवार, 9 अगस्त 2011

व्यक्ति निर्माण : मातापिता व शिक्षक

मातापिता व प्राईमरी शिक्षक का व्यक्तिनिर्माण मेँ महत्वपूर्ण स्थान होता है .यही बालक में समृद्ध नजरिया बनाने मेँ सहायक होते हैँ. भौतिक अभाव के बीच भी माता पिता को परिवार का वातावरण शान्तिपूर्ण,प्रेमयुक्त,परस्पर सहयोगी बनाये रखते देखा गया है.सभी संसाधनों से युक्त परिवार में तक माता पिता शान्ति प्रेम का वातावरण बनाये रखने मेँ असफल हैं.बस,सब नजरिया व सोंच का खेल है.जहां दूसरे के लिए त्याग व समर्पण की भावना नहीं होती ,एक दूसरे के दुख दर्द को समझने की समझ नहीं होती वे परिवार को क्या चलायेंगे?केवल रोटी कपड़ा मकान ही काफी नहीं है.


माता पिता के बाद व्यक्ति निर्माण में शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है .विशेष कर प्राईमरी शिक्षक की.समाज व इन्सान इन्सान के बीच स्वस्थ सम्बन्धों प्रति नजरिया प्राईमरी ऐजुकेशन से ही बनना प्रारम्भ हो जाता है.


दोष हमेशा नई पीड़ी को दिया जाता है लेकिन दोषी पुरानी पीड़ी होती है या सब विधाता का खेल .माता पिता चाचा चाची आदि बुजुर्गों व अन्य के साथ जैसा व्यवहार करते हैं उसका प्रभाव नई पीड़ी पर जरुर पड़ता है .वैसी ही आदते बनती हैं व समझ पैदा होती है .

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