रविवार, 23 अक्तूबर 2011

अपना दर्द जो उसका इन अपनों को एहसास न होता है!

अपनों के बीच में बेगानापन महसूस होता है

अपना दर्द जो उसका इन अपनों को एहसास न होता है.

इन अपनों के बीच यदि घुट घुट जीना है

तो इससे अच्छा तो दुश्मन से गले लगाना है..


अपने दर्द को किसने दी सहानुभूतियोँ की हबा

कौन अपना कौन पराया समझ न आया

तब अन्जानों के प्यार को
सहजना चाहा है

अन्जानों को अपना बना बना दूर जाता रहा है..


भटकते रहे सुकून की तलाश मेँ
कब मिट सके दर्द मेरे इस जहाँ मेँ

दर्दोँ को दिल समेटे मुस्कुराते रहे

मेरे छिपे दर्द को जानने की फुर्सत किसे..


एक वो हादसा ख्वाब मेँ आता है रोज रे

मौत को बुलाता हर रात रोज मैँ

एक हैं वो जो जिएं औरों के प्यार मेँ

और एक हम हैँ लगे जो खुद को संवारने मेँ...


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मेरें Nokia फ़ोन से भेजा गया

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