बुधवार, 15 फ़रवरी 2012

वैलेंटाइन डे(valentine day): प्रेम का पर्व????

अन्य पर्वोँ की तरह ये पर्व भी इस बात का प्रतीक हैँ कि रोजमर्रे की जिन्दगी से जो बातेँ दूर हो चुकी हैँ ,उनकी याद मेँ ढ़ोँग व पाखण्ड दिखाना.हम रोजमर्रे की जिन्दगी मेँ तक अपनी निजता से दूर हो चुके हैं .हमारी निजता है हमारी आत्मा व हमारी प्रकृति मेँ .हमारा अपनी आत्मा व प्रकृति की आवश्यकताओँ के लिए जीना तो दूर की बात हम अपनी आत्मा व प्रकृति की शाश्वत आवश्यकताओँ से परिचित तक नहीँ हैँ .हम बनवटी तथ्योँ मेँ उलझ कर रह जाते हैँ .ऐसे मेँ अट्ठाने प्रतिशत मनुष्य प्रेम की ए बी सी डी तक नहीँ जानते .


प्रेम जिसमेँ जाग जाता है ,उसमेँ महानता के बीज विकसित हो जाते हैँ .वह उदार हो जाता है .

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Date: Sunday, February 12, 2012 10:57:31 AM GMT+0530
Subject: विप्लव विकल्प विकास वैलेंटाइन डे(valentine day): प्रेम का पर्व????

वैलेंटाइन डे(valentine day): प्रेम का
पर्व????<http://ashutoshnathtiwari.blogspot.in/2012/02/blog-post.html>

अगर पश्चिम में मानसिक और बौधिक रूप से इतना प्रेम भरा पड़ा है की, वहां से
प्रेम का त्यौहार, हमे उस धरती पर आयात करना पड़ रहा है जहाँ निष्काम प्रेम
में सर्वस्व समर्पण की प्रतिमूर्ति मीराबाई पैदा हुई, तो पश्चिम में ओल्ड एज
होम सबसे ज्यादा क्यों हैं?? क्यों पश्चिम का निष्कपट प्रेम वहां होने वाले
विवाह के रिश्तों को कुछ सालो से ज्यादा आगे नहीं चला पाता.उस प्रेम की
मर्यादा और शक्ति तब कहा होती है ,जब तक बच्चा अपना होश संभालता है ,तब तक
उसके माता पिता कई बार बदल चुके होते हैं और जवानी से पहले ही वो प्रेम से परे
एकाकी जीवन व्यतीत करता है I

वैलेंटाइन डे(valentine day): प्रेम का
पर्व????<http://ashutoshnathtiwari.blogspot.in/2012/02/blog-post.html>

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शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

नेताओं का भ्रष्ट तंत्र : सुधांशु यादव ,ग्राम दिउनी सिउरा ,कटरा ,शाहजहाँपुर

ये देश के नेताओँ जरा देश की सेवा कर लो

मैँ मौका देता हूँ ,अब तो सुधर लो .

पाँच साल के लिए मैँ चुनता तुमको

खिलौना समझ कर इस देश से मत खेलो .


ये देश ...................................कर लो .

हमने ही इनको पाला जो हमेँ सताते हैँ

जब वोट माँगने आते हैँ ,पैसोँ पर गिर जाते हैँ .

एमपी विधायक बन जाते तो नजर नहीँ आते हैँ

ऐसे ही नेता एक दिन मिट्टी मे मिल जाते हैँ .


ये देश ................................कर लो .

जिसे देश का सेवक समझा वो ही दुश्मन निकले

इस महान देश के आंसू फूट फूट कर निकले


देख कर देश की हालत , मन मेरा घबराता


जिसे देश का रक्षक समझो वही इसे ठुकराता .


ये देश ................................कर लो .


जनता से ऐसे नेता बनते


जो कुकर्म के डगर पर चलते .

अरबोँ रुपये घर मेँ निकलते

फिर भी धन को रोते रहते .

ये देश ........................................कर लो
.


ये नेता न्याय नहीँ करते

अन्याय यहाँ पर ये करते


ये न्याय के वीरोँ तुम जागो

मैदान से तुम मत भागो .

ये देश .........................................कर लो .
- द्वारा नरेश पाल सिंह यादव

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Date: Sunday, February 5, 2012 3:27:09 AM GMT+0000
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